*अच्छे के चक्कर मे सच्चे को छोड़ने की प्रवृती से बचे**तन हो या मन इनका बढ़ना हानिकारक है -आर्यिका सुरम्यमतीजी*

*केकड़ी 11 सितम्बर (ब्यूरो )*
*मानव जिन्दगी में अच्छे के चक्कर में सच्चे को छोड़ देता है इस प्रवृत्ति से बचना चाहिए। जिनेन्द्र देव की पूजा आराधना की द्रव्य शुद्ध होगी तभी भाव शुद्ध हो पायेंगे। चाहे तन हो या मन इसका वजन बढ़ना हानिकारक है। इंसान को निज स्वार्थ से हटकर थोड़ा बहुत परमार्थ की ओर बढ़ने की आकांक्षा रखनी चाहिए। महान पुण्योदय से मनुष्य जीवन मिला है और पूर्व पुण्योदय से ही धन सम्पति सुख सुविधाएं मिलती है पुण्य के उदय से धर्म – दान परमार्थ आदि कार्यो में द्रव्य लगाना चाहिए। धर्म कार्य में लगाते हुए पाप कर्मों का क्षय करना चाहिए।* *प्रत्येक प्राणी मात्र की आत्मा शक्ति रूप में साक्षात परमात्मा है अतः सबको समान समझना चाहिए।* *जो व्यवहार तुम्हें दूसरों के द्वारा प्रतिकूल लगता है वैसा व्यवहार तुम्हें दूसरों के प्रति नहीं करना चाहिए। आवश्यकता से अधिक धन संग्रह करने से बचना चाहिए।* *जिस बात या जिस चीज को देखा या सुना हो वैसा नहीं कहना यह भी धर्म के विरुद्ध है। समस्याओं का आना कोई बड़ी बात नहीं है जबकि समस्याओं का समाधान खोजना बहुत बड़ी बात है। निज का निज में खो जाना परमात्मा बनने का सुंदर उपाय है। आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्य मति माताजी ने चातुर्मासिक धर्म देशना के अंतर्गत आयोजित धर्म सभा में अपने धर्मोपदेश में कहे।*
*प्रातः जिनाभिषेक, शांतिधारा, जिनेन्द्र अर्चना एवं दैनिक धार्मिक क्रियाएं आर्यिका संघ के सानिध्य में सम्पन्न हुई।*
*मध्यान्ह में आर्यिका माताजी द्वारा दैनिक स्वाध्याय के अंतर्गत गोम्मटसार जीवकांड ग्रन्थ का स्वाध्याय एवं जिज्ञासा समाधान हुआ।*
*प्रातः आर्यिका संघ के साथ श्रीजी को पालकी में विराजमान कर गाजे बाजे जुलूस के साथ धर्म सभा पंडाल में पहुंचे। आर्यिका संघ के सानिध्य में बाल ब्रह्मचारिणी कनक दीदी एवं निकेत शास्त्री के निर्देशन में मय गाजे बाजे संगीत के साथ भक्तामर विधान सम्पन्न हुआ।* *विधान के सौधर्म इन्द्र बनने का सौभाग्य भागचंद, ज्ञानचंद, जैनकुमार, विनय कुमार, वर्धमान, सोनू, मोनू, भगत सावर वाले परिवार ने प्राप्त किया।*
*मीडिया प्रभारी रमेश बंसल एवं पारस जैन ने बताया कि श्री जिनेन्द्र देव की शांतिधारा करने का सौभाग्य रमेश चन्द, शकुन्तला, अनिल कुमार, प्रीति, स्नेहलता, स्वाति बंसल मेहरूकलां ने प्राप्त किया। आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का पुण्यार्जन रमेश चन्द, विनोद कुमार, संजय कुमार उणियारा परिवार एवं नोरतमल, बिरदीचंद रामथला परिवार ने प्राप्त किया।*
*शाम को आरती, भक्ति संगीत, आनंद यात्रा, प्रश्नोत्तरी सहित भक्तामर आराधना एवं दीप अर्चना एवं महाआरती सौधर्म इन्द्र भागचंद, ज्ञानचंद, जैन कुमार, विनय कुमार, वर्धमान, सोनू, मोनू भगत सावर परिवार द्वारा एवं दीप अर्चना पुण्यार्जक परिवारों द्वारा किया गया एवं पूर्णाहुति के साथ भक्तामर आराधना दीप अर्चना सम्पन्न हुआ।*




