
*केकड़ी,( 23 जुलाई)अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-1, केकड़ी के न्यायाधीश आशीष बैंदाड़ा ने 17 वर्ष पुराने चेक अनादरण (धारा 138, परक्राम्य लिखत अधिनियम) के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आरोपी बिरदा सिंह पुत्र मंगल सिंह,निवासी देवली (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी,सहारा इंडिया) को दोषी ठहराया है।न्यायालय ने आरोपी को दो वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाने के साथ परिवादी को 70 हजार रुपये प्रतिकर राशि अदा करने के आदेश भी दिए हैं।*
*परिवादी सुरेश आचार्य पुत्र शिवनारायण आचार्य की ओर से अधिवक्ता मनोज आहूजा के माध्यम से प्रस्तुत परिवाद में बताया गया कि वर्ष 2009 में आरोपी ने 35 हजार रुपये उधार लिए थे।राशि लौटाने के तकाजे पर आरोपी ने अपने बैंक खाते का चेक दिया,जिसे बैंक में प्रस्तुत करने पर “स्टॉप पेमेंट” के कारण अनादरित कर दिया गया।*
*इसके बाद परिवादी ने आरोपी को विधिक नोटिस भेजा,लेकिन नोटिस प्राप्त होने के बावजूद आरोपी ने भुगतान नहीं किया।इस पर न्यायालय में धारा 138 एन.आई.एक्ट के तहत परिवाद प्रस्तुत किया गया।*
*सुनवाई के दौरान आरोपी ने क्षेत्राधिकार पर आपत्ति,विधिक नोटिस एवं रजिस्टर्ड डाक की रसीद में तिथि संबंधी अंतर तथा चेक गुम होने की सूचना का हवाला देकर परिवाद खारिज करने का आग्रह किया।*
*परिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता मनोज आहूजा,भैरूसिंह राठौड़, अभिनव जोशी एवं भावेश जैन ने सर्वोच्च न्यायालय तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायिक दृष्टांत प्रस्तुत करते हुए तर्क दिया कि कार्यवाही के अंतिम चरण में क्षेत्राधिकार पर आपत्ति स्वीकार नहीं की जा सकती।साथ ही केवल लिपिकीय त्रुटियों के आधार पर न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता तथा चेक गुम होने के दावे के समर्थन में प्राथमिकी दर्ज होना आवश्यक है।**
*दोनों पक्षों की दलीलों,दस्तावेजी एवं मौखिक साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने परिवादी पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए आरोपी बिरदा सिंह को दोषी करार दिया तथा उसे दो वर्ष के साधारण कारावास एवं परिवादी को 70 हजार रुपये प्रतिकर राशि अदा करने का आदेश पारित किया।*





